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झारखंड मै मर्दो को नसबंदी से लगता है डर

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आज भारत देश मै नसबंदी केवल महिला को ही करवानी पड़ रही है क्युकी देश के मर्द को इस से डर लगता है. ऐसे ही झारखण्ड मै देखने को मिला जहा पर यदि आप जाओ तो आप को हर स्थान पर होडिंग्स जिस पर लिखा ‘चीरा न कोई टांका, पुरूष नसबंदी है आसान’ जैसे प्रचार दिखाई दे गए.

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लकिन हकीकत मै यहाँ बिलकुल उलट है. यहाँ मर्द नसबंदी करवाने से कन्नी काट जाते हैं. होर तो होर महिलाओ पर नसबंदी कारवाने के लिया जोर डालते है.

जबकि सरकार नसबंदी करवाने पर महिलाओ को 1400 और पुरूषों को 2000 रुपए देती है. सरकार ने महिलाओ से अधिक राशि मर्दो के लिए पहले से ही तय की हुई है. यदि कोई गांव का किसी को नसबंदी करवाने के लिए हस्पताल तक ले जय तो उसे तीन सो रुपए और यदि मर्द अपने आप हस्पताल तक नसबंदी करवाने जाये तो उसे भी तीन सो रुपए दिए जाते है .

रांची जिले के एक गांव की महिला से से जब पूछा तो उस का भी बताया की गांव के मर्दो मै ये धरना है की नसबंदी करवाने से उन को कमजोरी आ जाय गई. जिस के करण वो नसबंदी करवाने से कन्नी काट जाते है और यहाँ की महिला का भी ये ही मानना है की मर्दो को बाहर का काम खेती-बाड़ी की संभल करनी पड़ती है.  इस लिए वो नसबंदी नहीं करवा सकते है.

मर्दो को नसबंदी करवाने के लिए राजी करना आसान नहीं होता. अगर कोई मर्द मान भी जाय तो वो ये बोल कर कन्नी काट जाता की अपनी पत्नी से पूछ कर फिर बतये गा. बल्कि वो मर्द घर मै अपनी पत्नी पर जोर डालता है की वो ही नसबंदी करवाने जाय और फिर पत्नी भी ये सोच कर चुप रहते है पति मै अगर कमजोरी आ गई तो बाहर के काम कौन संभाले गा.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार झारखंड के आंकड़ बताते हैं कि 2015-16 में दिसंबर महीने तक महज 2048 मर्दों ने नसबंदी कराई.

jharkhand

भारत मै शहर के तुलहना मै गांव मै लगभग 40 फीसदी लोग नहीं जानते कि परिवार नियोजन क्या होता है. परन्तु शहर के लोगो को नसबंदी के बारे मै पता होते हुए भी वो नसबंदी करवाने से डरते है. जब हम ने शहर की महिलाओ से पूछा तो उन का भी ये बोलना था की मर्दो को नसबंदी करवाने से डर लगता है और वो इस बात से हमेशा कन्नी काटते है. गांव और शहर की एक जैसे स्थिति बानी हुई है.

नसबंदी के सवाल पर झारखंड पुलिस के एक जवान रमेश कहते हैं- “यहां तो महिलाओं का बंध्याकरण सुरक्षित नहीं है, मर्दों की कौन कहे.”

28 दिसंबर को उनकी पत्नी ने झारखंड की राजधानी रांची के सदर अस्पताल में बंध्याकरण का ऑपरेशन कराया था. दो हफ्ते बाद जब वो टांका कटाने और कमजोरी बताने अस्पताल गईं, तो उन्हें प्रेग्नेंसी की जांच कराने को कहा गया.

Jharkhand-women

जांच के क्रम में पता चला कि वे गर्भवती हैं. रमेश ने अस्पताल के सिविल सर्जन से इस बारे मै  शिकायत की है. फिलहाल इस मामले की जांच के लिए एक समिति बनाई गई है.

Article By: Ravinder

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26Jan, 2016 – 2:30am

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